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नोएडा में हॉटस्पॉट से लेकर 60 कोरोना पॉजिटिव आंकड़ों की दर्द गाथा, जरूर जानें
April 9, 2020 • सुरेश चौरसिया

नोएडा। नोएडा, गौतमबुद्ध नगर में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमित मरीजों को देखते हुए 8 -9 अप्रैल की रात्रि 12 बजे से चिन्हित 22 हॉट स्पॉट पर कड़ी चौकसी शुरू कर दी गई है। नोएडा के लिए 8 मार्च से 8 अप्रैल तक की  तिथि कोरोना संक्रमण की दृष्टि से बेहद डराने वाला रहा है।

 बता दें कि नोएडा में 8 मार्च को ही इटली से आया गाइड शख़्स नोएडा लौटा था, तब यहां एक मामले की शुरुआत हुई थी और वह बढ़ते- बढ़ते अब एक माह में 60 कोरोना मरीजों तक जा पहुंची है। इस शख्स का एक मकान नोएडा में भी है और दूसरा दिल्ली में है।

नोएडा में कोरोना का मामला तब अधिक बढ़ा जब सेक्टर 135 स्थित सीजफायर कंपनी में ब्रिटिश नागरिक जॉन ऑडिट करने आया था। सीजफायर कम्पनी में उसके संपर्क में आने से नोएडा व गौतमबुद्ध नगर जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 44 जा पहुंची है। इस प्रकार आंकड़े बता रहे हैंं कि नोएडा, गौतबुद्ध नगर में 8 मार्च से 31 मार्च तक 38 कोरोना वायरस मरीज तथा 8 अप्रैल तक 22 मरीजों की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट की पुष्टि हो चुकी है।

बता दें कि जिले में 700 बेड कवारेनटाईन के लिए उपलब्ध है तथा ग्रेटर नोएडा में डेढ़ सौ अतिरिक्त बेड भी बनाए गए हैं। नोएडा के शिशु अस्पताल और ग्रेटर नोएडा के जिम्स हॉस्पिटल में भी मरीजों को रखा जा रहा है, जहां इलाज किया जा रहा है। शारदा हॉस्पिटल में भी 100 बेड का अतिरिक्त आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। यानी उत्तर प्रदेश शासन और नोएडा प्रशासन द्वारा पूरी तैयारियां की गई है, ताकि कोरोना के प्रभाव को निपटा जा सके। जिला प्रशासन इससे निपटने के लिए हर संभव कोशिश में जुटा है और हर रणनीति के तहत काम किया जा रहा है।

नोएडा प्राधिकरण द्वारा गरीबों तक राहत सामग्री पहुंचाने का एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण द्वारा अब तक नोएडा में 4,59,947 पैकेट 5 किचन सेक्टरों के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा चुका है। प्राधिकरण के हेल्पलाइन नंबर 8860 032 939 एवं नोएडा ऐप के माध्यम से लोगों के घर पर ही दवाओं एवं किराना सामानों का वितरण किया जा रहा है। नोएडा में कुल 93 व्यक्ति शेल्टर होम में आश्रित हैं। यह शेल्टर होम बरात घरों एवं सामुदायिक केंद्रों में बनाया गया है।

अभी सूचना मिली है कि चिन्हित हॉटस्पॉट स्थानों पर फल एवं सब्जियां पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन संकल्पित होकर मंडी से वाहन रवाना कर दिए हैं। जनपद में चिन्हित 22 हॉटस्पॉट पर पूर्ण रूप से किए गए सीलिंग के दौरान जिलाधिकारी सुहास एल वाई के नेतृत्व में मंडी समिति के अधिकारी सभी संबंधित हॉटस्पॉट स्थानों पर पर्याप्त मात्रा में सब्जी एवं ताजे फल उपलब्ध कराने के लिए तत्पर है। मंडी से सभी वाहन हॉटस्पॉट स्थानों के लिए रवाना किए गए हैं। जिलाधिकारी सुहास एल वाई ने समस्त जनपद वासियों के लिए आह्वान है कि कोई भी नागरिक पैनिक ना करें। सभी घरों के अंदर रहे। आवश्यक वस्तुएं जिला प्रशासन की ओर से निरंतर उपलब्ध कराने की कार्यवाही की जा रही है। 

नोएडा, गौतमबुद्ध नगर में 22 हॉट स्पॉट चिन्हित हैं तो यहां के नागरिकों को काफी सतर्कता के साथ कोरोना महामारी का डटकर मुकाबला करना है। आइए जानते हैं इस हॉटस्पॉट के बारे में और यहां के नागरिक क्या कर सकते हैं या क्या नहीं -

> इलाके के अंदर और बाहर जाने वाले प्वाइंट्स को पूरी तरह सील कर दिया जाता है।

>किसी भी दुकान के खुलने की इजाजत नहीं होती है। यहां तक की मेडिकल स्टोर को भी बंद कर दिया जाता है।

 प्रशासन की तरफ से हर जरूरी सामान की होम डिलेवरी कराई जाती है।

एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड को भी एंट्री के लिए परमिशन लेनी पड़ती है।

 हॉटस्‍पॉट इलाकों में मीडिया के घुसने पर भी पाबंदी रहती है। सिर्फ डॉक्टर को जाने की इजाजत होती है लेकिन वो भी स्पेशल पास के जरिए।

 घर-घर जाकर जांच की जाएगी कि किसी में संक्रमण के लक्षण तो नहीं हैं या कोई व्‍यक्ति पॉजिटिव मरीज के संपर्क में तो नहीं आया, इसका भी पता लगाया जाएगा।

हॉट-स्पॉट लागू होने पर प्रशासन की जिम्मेदारियां अधिक बढ़ जाती है। यहां नागरिकों को जीवन रक्षक सुविधाओं को मुहैया कराने की जिम्मेदारी उनकी होती है। आंकड़ों की बाजीगरी और दिखावे की भावना से अलग हटकर यथार्थ के धरातल पर काम करना होता है, ताकि जरूरतमंदों तक खाद्य आपूर्ति से लेकर सामानों तक वितरण एक निश्चित अवधि तक उपलब्ध कराने की भी जिम्मेदारी उनकी होती है, क्योंकि ऐसे में नागरिक प्रशासन के अधीन होते हैं।  वे प्रशासन के कड़े नियमों का पालन कर रहे होते हैं। ऐसे में प्रशासन नागरिकों को कितना सहयोग पहुंचा पाती है, यह व्यक्ति के द्वारा दी गई जानकारी से स्पष्ट हो सकेगा।

 साथ ही साथ आम नागरिकों से भी अपील है कि वह घर पर ही रहें, घर से बाहर ना निकलें। ज्यादा इमरजेंसी जरूरत हो, तभी वह घर से बाहर निकलें,  वह भी प्रशासन से सहयोग लेकर।