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MSME इंडस्ट्रियल एसोसिएशन नोएड ने प्राधिकरण के 1400 फैक्ट्रियों के खोलने व 68000 श्रमिकों के काम करने के दावे पर किया सवाल खड़ा ?
May 14, 2020 • सुरेश चौरसिया

नोएडा।  MSME इंडस्ट्रियल एसोसिएशन नोएडा का आरोप है कि उद्यमी लोग स्थानीय प्रशासन से बहुत परेशान हो गए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने कहा है कि सैकड़ों उद्यमी सदस्य उनसे सम्पर्क में हैं, क्योंकि वे उद्यमी संगठन का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी उद्यमी अभी इतने ज्यादा परेशान हैं कि कुछ उद्यमियों के पास तो खुद के पास खाने की समस्या होने लगी है और बहुत से उद्यमियों के सरकारी और निजी औद्योगिक प्रतिष्ठानों के ऑर्डर भी कैंसल हो रहे हैं और बहुत से उद्योग जिनको चलाने की परमिशन भी मिली है, उनके कर्मचारी मजदूर भी मिल नहीं रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्राधिकरण ने दावा किया है और मीडिया में खबर दी है कि 1400 फैक्ट्रियों को चलाने की परमिशन दी गई है, जिनमें 68000 के लगभग मजदूर काम कर रहे हैं। परन्तु ये दावा बिल्कुल ठीक नहीं है, क्योंकि जिन 1400 फैक्ट्रियों की बात कर रहे हैं, उनमें से 1000 फैक्ट्री भी अभी तक नहीं चालू हो पाई है। कारण कि कुछ फैक्ट्री मालिक दिल्ली, फरीदाबाद ,गुरुग्राम और गाज़ियाबाद रहते हैं और जिन्होंने ऑनलाइन परमिशन ले ली है, लेकिन नोएडा आ ही नहीं पा रहे हैं और यही स्थिति मजदूरों, कर्मचारियों की भी है।

श्री नाहटा ने कहा कि प्राधिकरण का दावा कि 68000 मजदूर काम पर लग गए हैं, हम उसको भी सिरे से खारिज करते हैं, क्योंकि औसतन 5 मजदूरों से ज्यादा उपरोक्त कारणों के चलते काम पर नहीं आ पा रहे हैं और 90% मजदूर झूगियों , खोड़ा, विजयनगर, दिल्ली ,अन्य सीमाओं के पार फंसे होने के कारण आ ही नहीं पा रहे हैं। इसलिए 7000 से 10000 मजदूर ही काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रशासन द्वारा सभी लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम वर्ग के उद्योगों को बिना शर्त कम से कम 5 मजदूरों के साथ काम करने का अवसर प्रदान करना होगा तभी मजदूर संभल पाएंगे और तभी फैक्ट्रियां बचेगी, अन्यथा फैक्ट्रियां ही बन्द हो जाएगी और सरकार का पैकेज भी धरा का धरा ही रह जाएगा और देश के प्रधानमंत्री जो देश को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देख रहे हैं, वो कभी पूरा नहीं हो पाएगा।

उन्होंने कहा कि सभी उद्यमी अपने अपने नाम से सीधे  रिपोर्ट मुख्य मंत्री तक पहुंचा कर नोएडा के उद्योग जो बेवजह कंटेनेमेंट क्षेत्र में कर रखा है, उसको  कंटेनमेनेट क्षेत्र से बाहर निकालते हुए लघु सूक्ष्म उद्योग चलाने की परमिशन दिलवाने में अग्रसर हों।

उन्होंने कहा कि नोएडा में MSME वर्ग के उद्योगों के साथ जो कुछ हो रहा है, ठीक नहीं हो रहा और उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की है। दर्जनों उद्यमी तो इतने परेशान हो चुके हैं कि वो अब नोएडा में उद्योग बिल्कुल भी नहीं चलाना चाहते। जैसे ही लॉक डाउन खुलेगा वो हरियाणा, उत्तराखण्ड,राजस्थान,दिल्ली और उत्तर प्रदेश के ही अन्य जिलों में या देश के अन्य राज्यों में जाने को तैयार हैं।

श्री नाहटा आरोप लगाया कि जिला प्रशासन उद्योगपतियों की बात न सुन सरकार की गाइड लाइन का हवाला देते हुए उद्योगों के हितों में काम बिल्कुल भी नहीं कर रहा है और यही हाल प्राधिकरण का भी है, क्योंकि अगर सरकार की तरफ से फैक्ट्रियां खोलने की परमिशन न आई होती तो ये 1000 के लगभग उद्योग चालू जो हुए हैं, वो भी न  चल पाते। उद्यमियों से उन्होंने कहा कि  CORONA से लड़ाई की चलते सोशल डिस्टेंस बनाए रखना है, हम सभी को अपना भी ध्यान रखना है।