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महाराष्ट्र के पालघर में संतों की निर्मम हत्या बेहद शर्मसार करने वाली है
April 20, 2020 • सुरेश चौरसिया

नई दिल्ली। भारत संत -महात्माओं प्रदेश कहा जाता है। भारत सनातन काल से ही साधु-संतों, ऋषि /महात्माओं के प्रभाव और ज्ञान दर्शन का केंद्र रहा है। पर महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं को भीड़ ने पुलिस के सामने ही पीट - पीट कर निर्मम हत्या कर दी। यह भारतीय महात्माओं के संस्कृति और दर्शन में बेहद शर्मनाक की बात है। सबसे बड़ी बात  है कि इसे राजनीति सियासी रंग देने की भी कोशिश कर दी गई है।

महाराष्ट्र के पालघर में संतों की निर्मम हत्या को लेकर पूरे देश की सियासत गरमा गई है। भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर उद्धव सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। इस बीच इस मामले में नया मोड़ आ गया है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सुनील देवधर ने एक ट्वीट करते हुए घटना के समय एक एनसीपी और तीन सीपीएम नेताओं के वहां मौजूद होने की बात कही है। सुनील देवधर के इस ट्वीट के बाद भाजपा और हमलावर हो गई है और मॉब लिंचिंग की इस घटना को एक बड़ी गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया है। विहिप ने भी इस मुद्दे को लेकर वामपंथियों की घेराबंदी की है।

दरअसल इस मामले में नया मोड़ तब आया जब भाजपा नेता सुनील देवधर ने एक ट्वीट के जरिए आरोप लगाया कि घटना के समय वहां एनसीपी का एक जिला पंचायत सदस्य और सीपीएम के तीन पंचायत सदस्य भी मौजूद थे। उन्होंने इन चारों के नाम का भी खुलासा किया है। देवधर ने अपने ट्वीट में लिखा कि स्थानीय लोगों के अनुसार वह शख्स शरद पवार की पार्टी एनसीपी का जिला पंचायत सदस्य काशीनाथ चौधरी है। उसके साथ सीपीएम के पंचायत सदस्य विष्णु पात्रा, सुभाष भावर और धर्मा भावर भी वहीं पर मौजूद थे।

सुनील देवधर के इस ट्वीट के बाद भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने महाराष्ट्र के उद्धव सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि एक गहरी साजिश के तहत संतों की हत्या की इस घटना को अंजाम दिया गया। पात्रा ने कहा कि पालघर मॉब लिंचिंग की घटना में यह एक बहुत बड़ा खुलासा है जो किसी गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि घटनास्थल पर राजनीतिक पार्टियों के नेता क्या कर रहे थे। पात्रा ने कहा कि जिन पार्टियों के नेता वहां मौजूद थे, वे सभी भगवा से नफरत करने वाले लोग हैं।

इस बीच विश्व हिंदू परिषद ने भी पालघर में दो संतों और उनके सहयोगी की हत्या पर गहरी नाराजगी जताते हुए इसे षडयंत्र का हिस्सा बताया। विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि पहले भी इस क्षेत्र में कई बार वामपंथियों ने क्रूरतापूर्ण हिंसा की घटनाएं की हैं। उन्होंने कहा कि इस हत्याकांड की साजिश पहले रची गई और घात लगाकर संतों पर हमला किया गया। विहिप नेता ने उद्धव सरकार से मांग की कि मामले की गहराई से जांच पड़ताल कर हत्यारों को कठोरतम दंड दिया जाए।

विहिप नेता ने कहा कि पालघर इन दिनों वामपंथी गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। वामपंथी नेता वहां जोर-शोर से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। वामपंथियों का हिंदू नेताओं की हत्याएं करने का पुराना इतिहास रहा है। वे मॉब लिंचिंग की घटनाओं को भी अंजाम देते रहे हैं। संगठन ने कहा कि दबाव के कारण कुछ लोगों की गिरफ्तारी तो जरूर की गई है, लेकिन मॉब लिंचिंग के मुख्य आरोपी अभी तक फरार हैं। उद्धव सरकार को तत्काल इस दिशा में कदम उठाते हुए ऐसे लोगों पर शिकंजा कसना चाहिए।

इस बीच कमी कवि कुमार विश्वास ने इस घटना को महाराष्ट्र सरकार के माथे पर कलंक बताया है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की धरा पर मित्रता और शत्रुता से ऊपर उठ चुके साधुओं को अगर उन्मादी भीड़ घेरकर मार दे तो यह उस धारा की ऐतिहासिक परंपरा पर धब्बा ही है। उन्होंने कहा कि यह वह धरा है जहां पर शत्रु पक्ष की महिलाओं तक को आदर दिया जाता है। कुमार विश्वास ने मांग की कि इस निर्मम घटना में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा पालघर की घटना को लेकर राजनीति कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि मुझे लगता है कि भाजपा हमारे समाज के इतिहास में बहुत ही विचलित कर देने वाली राजनीति कर रही है।

महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के कई नेताओं ने भी कहा कि भाजपा इस मामले को नाहक तूल दे रही है। उद्धव सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस घटना में शामिल सारे आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देने की तैयारी है। फिर भी भाजपा इस हत्याकांड को लेकर घटिया राजनीति करने से बाज नहीं आ रही है।