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लॉकडाउन पर नोएडा में भूमिगत हो गए पूर्वांचली नेता ? पार्ट : 2
May 10, 2020 • सुरेश चौरसिया

पार्ट : 2

बुरा मानो या मानो भला, पर बात कहेंगे खरी-खरी

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लिट्टी- चोखा और मछी- भात के जलसे तक ही सीमित रहे पूर्वांचली नेता, लॉकडाउन पर हो गए भूमिगत ?

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नोएडा। नोएडा, जनपद गौतमबुद्ध नगर में पूर्वांचल वासियों की बड़ी संख्या है। यहां पूर्वांचल के अमीर, गरीब, अधिकारी,-कर्मचारी, श्रमिक, मजदूर सभी वर्ग के लोग शामिल हैं। पर, लॉकडाउन के तीसरे चरण में सबसे भयानक असर पूर्वांचल के गरीब, श्रमिक, मजदूरों की जिंदगी पर पड़ रहा है। उनकी हालात चिंतनीय और विचलित कर रहा है, पर किसी भी पूर्वांचली नेताओं व समाज सेवकों की न तो उन पर नजर है, ना चिंता ही है।

पूर्वांचल वासियों अथवा पुरबिया समाज के ऐसे चंद नेता जो छठ महापर्व या महाकवि विद्यापति के नाम पर लिट्टी- चोखा अथवा मच्छी- भात का शानदार दावत देकर बड़े- बड़े आयोजनों का डंका पीटते रहे हैं और लाखों- करोड़ों तक की चंदा इकट्ठा कर पूर्वांचली जनता में शाही -शोहरत के रुतबे का प्रदर्शन करते हैं, ऐसे पुरबिया या पूर्वांचल वासियों के नेता आज नज़र नहीं आ रहे हैं।

जो लोग उन्हें पुरबिया समाज के मसीही, भाग्यविधाता या  सुख-दुख के साथी व सहयोगी साबित करते थे, वह लॉकडाउन पर मौनी बाबा बने हैं। वह न बाहर  निकल रहे हैं, न कोई मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं। दो सांत्वना के शब्द भी उनके जुबां पर नहीं है। उनका असली चेहरा आज पूर्वांचल वासियों के सामने प्रकट हो गया है।

दरअसल, उनकी समाज सेवा या राजनीतिगिरी चंदा बटोरने व अपनी तिजोरी भरने तक सीमित रही है। वे इसी के बल पर चकले पर हमेशा रोटी बेलते रहे हैं, और मालदार बन कर अपने लोगों व समाज को धोका देते रहे हैं। ऐसे पूर्वांचली नेता या समाज सेवक चुनाव के दौर में झुग्गी- झोपड़ियों से लेकर सेक्टरों के बीच में वोट दिलाने हेतु दौड़ते देखे जाते हैं और किसी दल के स्टार प्रचारक की भूमिका में रहते हैं। वे पूर्वांचली समाज से वोट दिलाने के नाम पर और कथित चुनाव जिताने के नाम पर मोटी- मोटी कमाई करते हैं।

पर, पूर्वांचली लोगों के लिए दुर्भाग्य की बात है कि ऐसे पूर्वांचली नेता लॉकडाउन पर अपने समाज के बीच से ग़ायब हैं। आज जब नोएडा शहर में सांसद, विधायक और अन्य बड़े सामाजिक संगठनों द्वारा बड़े स्तर  पर भोजन या सूखा राहत सामग्री बांटकर जनसेवा का महायज्ञ संचालित किया जा रहा है, तो ऐसे में पूर्वांचली नेताओं का छुपे रहना आम पूर्वांचल वासियों के लिए बेहद शर्मसार करने वाली बात है।  क्योंकि वे मंचों से बड़ी-बड़ी उद्घोषणा कर आम पूर्वांचल वासियों के बीच सबसे बड़ा महानायक, समाज सेवक, रहनुमा और साथी तथा हित चिंतक बताने में थकते नहीं थे, वही नेता आज लॉकडाउन पर शर्म- हय्या तक भी त्याग चुके हैं।

आज नोएडा से भी श्रमिकों का पलायन हो रहा है, तो बड़ी संख्या में पलायन करने के लिए लोग उत्सुक हो रहे हैं, क्योकि राहत के नाम पर वे ठग्गे गए हैं। उनके सामने पापी पेट का सवाल है। ऐसे में जब पूर्वांचली समाज के नेता ही उनको बीच मझधार में छोड़ दिया है, तो दूसरों से उन्हें खाक मदद मिलेगी? यह सवाल भी है, पर सच्चाई से घिरा हुआ भी है। अगर आपको भी लगता है यही सच है और लॉक डाउन पर अपने समाज को त्याग कर उनके नेताओं ने यह पाप किया है, तो ज्यादा लोगों तक इस बात को पहुंचाएं और अधिक से अधिक शेयर जरूर करें। धन्यवाद!