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लॉकडाउन में दो पाटों के बीच पीस रहा मध्यम वर्ग !
May 13, 2020 • सुरेश चौरसिया

**   कोरोना महामारी में असंगठित सेल्फ एंप्लॉयड मिडिल क्लास बेबस, लॉक डाउन में सरकार की मदद का इंतजार.. 

नोएडा। कोरोना महामारी में पूरा देश जूझ रहा है। हर तबका परेशान है। सरकार उनके लिए योजनाएं बना रही है। शासन -प्रशासन की तरफ से हर प्रकार की मदद की जा रही है। लेकिन यह उनके लिए है जो संगठित हैं, मुखर होकर अपनी समस्याओं को रखते हैं।

परंतु, इस समय देश का बहुत बड़ा असंगठित सेल्फ एंप्लॉयड मध्यमवर्ग के लिए इस विपदा में न तो कोई योजनाएं बनाया जा रहा है और न ही कोई इन्हें मदद कर रहा है। इसके उलट इनके द्वारा दिए गए सर्विसेस का लोग महामारी का बहाना बना कर भुगतान भी नहीं कर रहे हैं। 

इनमें लाखों की संख्या में ट्यूटर छोटी कोचिंग(एकेडमिक के अलावा योगा, डांस, सिंगिंग, जूडो, कराटे, खेल क्लासेस, आदि), स्ट्रगलिंग कलाकार, गीतकार, संगीतकार, खिलाड़ी, नाटककार, लेखन एवं स्मॉल मीडिया पोर्टल संचालक, बंद मंदिर के पुजारी, टूर एंड टूरिज्म में होटल गाड़ी टिकट बुकिंग कर्ता, घरेलू प्ले स्कूल, ब्यूटी पार्लर, कैटरिंग, इवेंट प्लानर,,शादियों एवं विभिन्न सामाजिक धार्मिक कार्यक्रम के सर्विस प्रोवाइडर हर शहर हर कस्बे हर गांव में उपस्थित हैं और अपनी सेवाएं जनता जनार्दन को देते रहे हैं। 
ये असंगठित सेल्फ एंप्लॉयड मध्यमवर्ग सरकार को टैक्स भी देता है,  परंतु आज तक कोई मांग सरकार से नहीं किया। आज तक इनका कोई धरना- प्रदर्शन भी नहीं हुआ। यह खामोशी से जनहित का कार्य करते आ रहे हैं।

करोना महामारी के चलते विशाल असंगठित मध्यमवर्ग विकट आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है। लेकिन अभी तक सरकार एवं शासन प्रशासन की तरफ से कोई भी मदद नहीं पहुंचाई गई। इनके लिए अभी तक कोई योजना ही नहीं बना है। संभवतः सरकार एवं प्रशासन को इसका ज्ञान ही नहीं है।अगर ज्ञान भी है तो ये यही समझते हैं कि वे बेवकूफ हैं, जो हर तरीके से सरकार और उनकी योजनाओं के साथ हैं तथा सरकार के साथ खड़े रहते हैं। वह हमेशा चुप रहे हैं और चुप ही रहेंगे।

 ट्यूशन स्मॉल कोचिंग में पढ़ाने वाले शिक्षक असंगठित क्षेत्र से हैं। इनका कोई संगठन नहीं है। सरकार ने इनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। लॉकडाउन में सारा काम ठप है। लोग फल ,सब्जी, मेडिसिन आदि की खरीद, स्कूल की फीस मुश्किल से भर पा रहे हैं l ऐसे ही समस्या अन्य मध्यम वर्गीय लोगों के साथ है। आज लॉकडाउन पर इनके सामने खर्चों का ढेर लगा हुआ है, लेकिन आमदनी बिल्कुल नहीं है। इससे इनकी विवशता, लाचारी साफ दिखाई दे रही है।

यही हाल प्रवचन कर्ता,पुजारियों, जागरण करने वाले,भविष्य बताने वाले,लेखक, कलाकार,नाटककार, फ्रीलांसर पत्रकार,छोटे एवं घरेलू प्ले स्कूल संचालक ब्यूटी पार्लर  संचालक आदि लोगों का भी है। सरकार की तरफ से इन लोगों को आज तक एक पैसे की कोई मदद नहीं मिली। पर, सरकार को टैक्स व अन्य सहयोग देने में सबसे आगे रहे हैं।

 दुविधा एवं असमंजस यह भी है कि समाज को शिक्षा कला साहित्य दिशा निर्देशन देनेवाले बौद्धिक वर्ग किस प्रकार से अपनी समस्याओं को समाज व शासन प्रशासन के सामने रखें। यह वर्ग तो बिना किसी मदद के स्वरोजगारीत हैं। अब तक परिवार का भरण- पोषण करते रहे थे। इनका काम समाज एवं देश के कमजोर एवं जरूरतमंदों को सर्विसेस देना है। इसलिए यह खुलकर अपनी परेशानी एवं समस्याओं को देश के सामने नहीं रखते। यही कारण है कि इनका कोई संगठन भी नहीं बना है l

आखिर कोई सेल्फ एंप्लॉयड टीचर, लेखक  कलाकार गीतकार संगीतकार योग गुरु पुजारी मौलाना( छोटे अन्य सर्विस प्रोवाइडर कैसे कह सकता है कि वह संकट में है आर्थिक विपदा से जूझ रहा है,उसे मदद चाहिए। जब कि इन लोगों को भी अन्य लोगों की तरह राशन फल सब्जी दूध मेडिसिन आदि खरीदना स्कूल फीस,ईएमआई, टैक्स भरना होता है l

समाजसेवी एवं बी जे एन एस अध्यक्ष शैलेंद्र वर्णवाल बताया कि बड़ी संख्या में मौजूद सेल्फ एंप्लॉयड मध्यमवर्ग की भी सरकार का ध्यान जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री को ट्वीट करके इन सेल्फ एंप्लॉयड मध्यमवर्ग के इसके बारे में जानकारी दी हैं।

 इस महामारी में भी संकोच वश यह वर्ग  खामोश रहकर अपनी बेबसी से परेशान है, आर्थिक संकट से जूझ रहा है ,अपने भाग्य को कोस रहा है। उन्होंने उम्मीद की है कि है कि प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री  शासन /प्रशासन  इसे संज्ञान में लेंगे। इनके लिए भी कुछ योजनाएं बनाएगा जा सकेंगे, जिससे सेल्फ एंप्लॉयड मध्यमवर्ग को सरकार से मदद मिल सके।
इस संक्रमण काल में प्रधानमंत्री ने बड़े बजट( 20 लाख करोड़) की आर्थिक पैकेज देशवासियों के लिए घोषणा की है। इस राहत की बौछारें सेल्फ एंप्लॉयड बुद्धिजीवी एवं प्रोफेशनल के पास भी पहुंचने चाहिए।

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