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कोरोना वायरस के मद्देनजर मूल्य से अधिक दाम पर नहीं बेचे जा सकेंगे मास्क
March 14, 2020 • सुरेश चौरसिया

नोएडा। भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इसका फायदा  कुछ मुनाफाखोर  दुकानदार  मास्क को महंगे दामों पर बेच रहे हैं. बाजार में तरह-तरह के मास्क मौजूद हैं और दुकानदार ग्राहकों से मनमाना कीमत वसूल रहे हैं।  इसको ध्यान में रखते हुए सरकार भी लगातार कदम उठा रही है. इस बीच कोरोना वायरस के खतरे के कारण बाजार में मास्क और सेनिटाइजर की अनुपलब्धता को देखते हुए सरकार ने इन दोनों वस्तुओं को आवश्यक वस्तु अधिनियम में शामिल करने का फैसला किया है.

केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि कुछ हफ्तों से कोविड-19 (कोरोना वायरस) के मौजूदा प्रकोप के मद्देनजर कोरोना प्रबंधन के लिए लॉजिस्टिक संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है. दरअसल, मास्क (2 प्लाई और 3 प्लाई सर्जिकल मास्क, एन95 मास्क) और हैंड सेनिटाइजर या तो बाजार में मौजूद नहीं है या बहुत ज्यादा कीमतों पर इनकी बिक्री की जा रही है.

मंत्रालय के बयान के मुताबिक, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की अनुसूची में संशोधन किया है. इसके तहत मास्क और सेनिटाइजर को 30 जून 2020 तक आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत आवश्यक वस्तु के रूप में घोषित करने का आदेश दिया है.

सरकार ने विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत एक एडवाइजरी भी जारी की गई है. आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत राज्य, विनिर्माताओं के साथ विचार-विमर्श करके उनसे इन वस्तुओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाने के लिए कह सकते हैं जबकि विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत राज्य इन दोनों वस्तुओं की अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर बिक्री सुनिश्चित कर सकते हैं.