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कोई भी भवन स्वामी, सोसायटी प्रबंधक चिकित्सक/ पैरामेडिकल स्टॉफ से आवास खाली करने का नहीं बना पाएंगे दबाब, ऐसा करने पर होगी कार्रवाई
April 11, 2020 • सुरेश चौरसिया

**     भवन स्वामी, सोसायटी प्रबंधक अब चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टॉफ से आवास खाली कराये जाने का नहीं बना पायेंगे दबाव

नोएडा।  अपर पुलिस उपायुक्त कानून एवं व्यवस्था जनपद गौतमबुद्ध नगर आशुतोष द्विवेदी ने अवगत कराया है कि उ0प्र0 शासन, राजस्व अनुभाग-11 के शासनादेश संख्या -195/एक -11-2020-रा0-11 दिनांक 24.03.2020 द्वारा भारत सरकार के आपदा प्रबन्धन अधिनियम -2005 सपठित उत्तर प्रदेश आपदा प्रबन्धन अधिनियम-2005 की धारा -2 की उपधारा –(जी)  के अन्तर्गत कोविड-19 के कारण फैल रही महामारी को आपदा घोषित किया गया है तथा  इस महामारी के संक्रमण से प्रभावित मरीजों के उपचार एवं जीवन रक्षा में चिकित्सक / पैरामेडिकल स्टॉफ की महती भूमिका है, जो स्वयं के संक्रमण से बचाव के प्रबन्ध के उपरान्त सतत संक्रमित मरीजों के उपचार हेतु अपनी चिकित्सीय सेवाएं  प्रदान कर रहे है जोकि समुदाय के लिए आवश्यक है।

विभिन्न माध्यमों से यह तथ्य संज्ञान में आ रहे है कि अनेक भवन स्वामियों/सोसायटी के प्रबन्धकों द्वारा मात्र संक्रमण की आशंकाओं के कारण ऐसे चिकित्सक /पैरामेडिकल स्टॉफ पर उनके आवासों को खाली कराये जाने के लेकर दबाव बनाया जा रहा है। वर्तमान में आपातकालीन एवं आपवादिक परिस्थितियों में इस प्रकार का दबाव चिकित्सक /पैरामेडिकल स्टॉफ द्वारा समुदाय को दी जाने वाली आवश्यक सेवाओं के अनुरक्षण एवं आपदा प्रबन्धन पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है जिससे मानव जीवन और सामुदायिक स्वास्थ्य क्षेम को खतरा है ।

 यदि किसी भवन स्वामी/सोसायटी प्रबंधक द्वारा चिकित्सक / पैरामेडिकल स्टॉफ से आवास खाली कराये जाने को लेकर दबाव बनाये जाने के पुष्टिकारक तथ्य प्रकाश में आते है तो ऐसे भवन स्वामी/सोसायटी प्रबन्धकों के विरूद्ध राष्ट्रीय आपदा अधिनियम -2005 की धारा 51 एवं महामारी अधिनियम 1897 के अन्तर्गत विधि सम्मत दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून – 1980 में निरूद्ध किये जाने का भी प्राविधान है ।  

उन्होने बताया कि ऐसे चिकित्सक /पैरामेडिकल स्टॉफ जो कोविड-19 के संक्रमित मरीजों का सतत उपचार कर रहे है उनके आवास एवं संबंधित अन्य आवश्यक वस्तुओं में बाधा उत्पन्न किया जाना समुदाय के उपचार हेतु प्रदान की जाने वाली आवश्यक चिकित्सकीय सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। अतः धारा 144 सीआरपीसी के अन्तर्गत जनहित में जनपद गौतमबुद्ध नगर क्षेत्र के अन्तर्गत इस प्रकार एवं प्रकृति के किसी भी कार्य को करने को प्रतिबंधित किया गया है तथा तदविषयक आदेश जारी कर दिये गये है। यह आदेश दिनांक 30.04.2020 तक प्रभावी रहेगा ।
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