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कर्ज से डूबे व्यापारी ने हंसते-खेलते परिवार के साथ की आत्महत्या
February 25, 2020 • सुरेश चौरसिया

कटिहार। बिहार के कटिहार में आथिक तंगी के बीच सूदखोरों के दबाव से एक हंसते-खेलते परिवार ने सोमवार की रात आत्महत्या कर ली. पहले अपने मासूम बच्चे को जहर खिलाकर मार डाला फिर पति-पत्नी ने फंदे से लटकर आत्महत्या कर ली. घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज के निकट की है.



इस हृदयविदारक घटना की जानकारी जैसे ही मंगलवार की सुबह लोगों को मिली, जंगल में लगी आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गयी. घटना की जानकारी मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस दल बल के साथ घटना स्थल पर पहुंची तथा लटकटे शव को उतारते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

 जानकारी के अनुसार मनीष कुमार पिता सुबोध चंद्र झा मैथिल टोला निवासी 1999 से ही व्यवसाय कर रहे थे. वह लक्ष्मी लता ट्रेडिंग के नाम से दस वर्षों तक कई ब्रांडेड कंपनी का व्यापार उसने बखूबी किया. 2008 में उसने बिजनेश का ट्रेड बदलकर मोबाइल कंपनी का कार्य आरंभ किया. उसने पहली दुकान गर्ल्स स्कूल रोड तथा दूसरी दुकान मिरचाईबाड़ी शो रूम खोला. व्यवसाय में उसकी सिर्फ यह गलती रही कि उसने न कहना नहीं सीखा. इसका परिणाम रहा कि लोगों ने उसकी दुकान से लाखों रुपये उधार ले लिया. इसमें कुछ लोगों ने रुपया दिया एवं अधिकांश ने उसके रुपये ही मार लिया.

इस कारण उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गयी. आर्थिक स्थिति से उबरने के लिए मनीष बाजार से भी लाखों रुपया कर्ज ऊंचे ब्याज पर लिया था. इसके बाद वह धीरे-धीरे पूरे कर्ज में डूब गया. सूदखोरों का कड़ा तगादा व ब्याज दर के कारण मनीष पूर्ण रूप से आर्थिक संकट से घिर गया. इसके बाद उसके तथा उसके बड़े भाई रंजीत की दुकान की भी स्थिति चरमरा गयी. बैंक से भी उसके ऊपर कर्ज था. बैंक में रुपया जमा नहीं होने के कारण वह एनपीए हो गया था. अपनी साख बचाने के लिए वह बैंक का ऋण सूदखोर से तथा अन्य कार्य एवं कुछ जमीन बिक्री कर उसे चुकता कर रहा था.

थक गया जिंदगी के जद्दोजहद से बैंक से उठाये ऋण को वह तथा उसके परिजन किसी प्रकार चुकता कर ही रहे थे. इधर स्थानीय सूदखोर नित्य घर पर आकर उससे रुपये की मांग करते एवं उसके साथ तथा परिजनों के साथ अभद्रता के साथ पेश आते. मनीष के पिता बीमार ग्रस्त चल रहे थे. उनका हर्ट सर्जरी हुआ था. रोज-रोज के क्लेश को देख मनीष घर छोड़ मेडिकल कॉलेज के पास किराये का रूम लेकर होटल चलाने लगा. मनीष अपनी पत्नी व बच्चे को लेकर होटल के पीछे एक रूम में शिफ्ट हो गया, लेकिन सूदखोरों ने उसका पीछा वहां भी नहीं छोड़ा.

कई बार सूदखोरों ने उसके साथ मारपीट व पत्नी के साथ अभद्रता भी की. बावजूद मनीष अपने बात से डगमगाया नहीं, होटल चलाते हुए कई लोगों का तथा बैंक का भी उसने लाखों रुपये का कर्ज चुकता किया, लेकिन इस बीच स्थानीय सूदखोरों ने उसका जीना दुश्वार कर दिया था. नित्य सूदखोरों की धमकियां से उसे तथा उसकी पत्नी को प्रताड़ित व जलील होना पड़ता था. इस कारण वह जिंदगी से लड़ते-लड़ते थक गया था.

अंतत: उन्होंने एक नोट बुक लिखकर सोमवार की रात अपनी साढ़े तीन वर्षीय पुत्र को खाने में जहर खिला दिया. उसके बाद उन दोनों ने भी गले में फंदा डालकर आत्महत्या कर ली.