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दिल्ली की आबोहवा फिर हो रही जहरीली
October 15, 2020 • सुरेश चौरसिया

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की हवा जहरीली होती जा रही है। दिल्ली एनसीआर में गुरुवार की सुबह धूंध की एक मोटी परत देखने को मिली और दिल्ली की हवा काफी खराब पाई गई। धुंआधार धुंध के चलते और प्रदूषक तत्वों के हवा में जमा होने के कारण राजधानी दिल्ली की वायु गुणवत्ता गुरुवार सुबह 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गई। दिल्ली ने आज सुबह 11:10 बजे 315 का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) दर्ज किया। पिछली बार फरवरी में दिल्ली की हवा की गुणवत्ता इतने खराब स्तर पर थी। यह खतरनाक स्थिति तब है, जब दिल्ली की खराब होती आबोहवा पर नियंत्रण के लिए डीजल, पेट्रोल और केरोसिन तेल से चलने वाले जेनरेटरों पर पाबंदी लगा दी गई है। हालांकि, इस मुद्दे पर अब केंद्र बनाम दिल्ली सरकार भी होता दिख रहा है।  समाचार एजेंसी के मुताबिक, आज भी दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 'बहुत खराब' स्तर पर पहुंच गया है, जिसकी वजह से आसमान में धुंध ही धुंध छाई रही। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के आंकड़ों के मुताबिक, आईटीओ में एयर क्वालिटी इंडेक्स 366, आरके पुरम में 309, आनंद विहार में 313 और वजीरपुर में 339 दर्ज किया गया है। इन सभी जगहों पर प्रदूषण का स्तर 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच चुका है।  नासा की सैटेलाइट इमेजरी में पंजाब के अमृतसर, फिरोजपुर और फरीदकोट के पास और हरियाणा के पटियाला, अंबाला और राजपुरा में खेतों पराली जलती दिखाई दी है। हालांकि, दिल्ली की खराब होती हवा में पराली जलना बहुत बड़ा फैक्टर नहीं है। यह बात खुद केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़कर भी बोल चुके हैं।  पयार्वरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली के प्रदूषण 96 फीसदी स्थानीय कारकों से और मात्र चार फीसदी पराली के कारण है। जावडेकर ने दिल्ली समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण नियंत्रण के लिए गठित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के दस्तों को अपने आवास से रवाना करने से पहले यह बात कही। सीपीसीबी के 50 दस्ते दिल्ली-एनसीआर के शहरों में प्रदूषण की निगरानी करेंगे और प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। हर दल में एक वैज्ञानिक और अन्य कर्मचारी हैं।  केंद्रीय मंत्री प्रकाशस जावड़ेकर ने कहा कि सर्दियों के मौसम में दिल्ली में हमेशा प्रदूषण की समस्या गंभीर हो जाती है। इसमें हिमालय की ठंडी हवा, गंगा के मैदानों में बनने वाली नमी, हवा की धीमी रफ्तार, स्थानीय स्तर पर निमार्ण कार्य के दौरान बनने वाली धूल, सड़क किनारे की धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, लोगों द्वारा खुले में कूड़ा जलाया जाना, आसपास के राज्यों में किसानों द्वारा पराली जलाया जाना आदि कई कारक हैं। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली के प्रदूषण में पराली का योगदान मात्र चार प्रतिशत है। शेष 96 फीसदी प्रदूषण स्थानीय कारकों की वजह से है। हालांकि इसके बावजूद उन्होंने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने को लेकर पंजाब की कांग्रेस सरकार को कड़े शब्दों में हिदायत दी। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को ध्यान देना चाहिये कि वहां पराली ज्यादा न जले। पंजाब सरकार तुरंत हरकत में आये ताकि पराली कम जले। इससे राज्य के लोगों को भी परेशानी होती होगी। हालांकि, प्रकाश जावड़ेकर की इस टिप्पणी पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की प्रतिक्रिया भी आई है। अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया है और लिखा, बार-बार इनकार करने से कुछ नहीं होग। अगर पराली जलने से केवल 4 फीसदी प्रदूषण होता है, तो प्रदूषण में अचानक रात में ही यह वृद्धि क्यों हुई है? उससे पहले हवा साफ थी। एक ही कहानी हर साल। कुछ ही दिनों में दिल्ली में प्रदूषण को लेकर ऐसा कोई उछाल नहीं हुआ है?