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भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण ने की नई पार्टी 'आजाद समाज पार्टी' की घोषणा
March 15, 2020 • सुरेश चौरसिया

नोएडा। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर रावण ने आज नोएडा में अपने नई पार्टी  के नाम की घोषणा कर दी। उन्होंने पार्टी का नाम  'आजाद समाज पार्टी' रखा है।

नोएडा के सेक्टर 70 बसई गांव में कार्यक्रम के दौरान पंजाब, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश सहित कई जगहों के कई दलों जैसे  कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के कई पूर्व मंत्री, पार्षद और जिला अध्यक्ष समेत 98 नेताओं ने आज़ाद समाज पार्टी का हाथ थाम लिया।
इस मौके पर कार्यकर्ताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच झड़प भी हुई।

भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने नई पार्टी की घोषणा के साथ सक्रिय राजनीति में उतरने का ऐलान भी कर दिया। बता दें कि जिला प्रशासन ने कोरोना वायरस के कारण जिले में मनोरंजन, सार्वजनिक व सामूहिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा रखा है। भीम आर्मी ने कार्यक्रम स्थल के लिए जो जगह चुना था, वहां पर पुलिस ने रोक लगाते हुए कार्यस्थल पर ताला जड़कर नोटिस चस्पा कर दिया था। हालांकि बाद में  जिला प्रशासन ने चंद्रशेखर को कार्यक्रम करने की अनुमति  दे दी।
 जिला प्रशासन के मुताबिक कोरोना वाइरस के चलते पब्लिक स्थानों पर मीटिंग या कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकता। आज यहां उनके पार्टी के गठन में भारी भीड़ जमा हुई, जहां पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी नोकझोंक भी हुई।

उल्लेखनीय है कि 2017 में सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों और सवर्णों के बीच हिंसा में हजारों घर बेघर हो गया था. इस हिंसा के लिए प्रशासन ने भीम आर्मी और उसके प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को आरोपी बनाया था. भीम आर्मी का पूरा नाम भारत एकता मिशन भीम आर्मी है और इसका गठन करीब 6 साल पहले किया गया था. यूपी की योगी सरकार ने चंद्रशेखर को एकसाल तक के लिए रासुका के तहत जेल भेज दिया था. हालंकि बाद में उनके मां द्वारा छोड़े जाने की गुहार के बाद सरकार ने उन्हें 48 दिन पहले ही छोड़ दिया था.  दंगा के दौरान ही चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया पर 'द ग्रेट चमार' की मुहिम चलायी थी, जिसके बाद यह मुहिम देश के गांव-गांव तक पहुंच गयी थी. चंद्रशेखर ने 2019 को लोकसभा चुनाव मे वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफऱ चुनाव लड़ने का बिगूल फूंका था, लेकिन ऐन वक्त उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने की बात कहकर अपना कदम वापस खिंच लिया था.

 बसपा प्रमुख मायावती समय-समय पर चंद्रश़ेखर आजाद पर हमला बोलते रहती है. कई बार मायावती चंद्रशेखर को भाजपा की बी टीम बता चुकी है. हालांकि रावण मायावती के साथ मिलकर काम करने की बात कई बार दोहरा चुके हैं.  चंद्रशेखर का संबंध कांग्रेस से बढ़िया बताया जा रहा है. चंद्रशेखर द्वारा पार्टी की घोषणा से पहले यह कयास लगाया जा रहा था कि वे कांग्रेस में शामिल होंगे. आपको बता दें कि जेल के दौरान चंद्रेशखर की तबीयत बिगड़ गयी थी, जिसके बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी उनसे मिलने अस्पताल गयी थी.

उल्लेखनीय है कि चंद्रशेखर रावण 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीति का एक नया समीकरण बना सकते हैं। सहारनपुर में दलित और ठाकुरों में टकराव के बाद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर चर्चा में आए थे। सहारनपुर जेल से रिहा होने के बाद वे लगातार यूपी सरकार को चुनौती देते आ रहे हैं। चंद्रशेखर उसी जाटव समाज से आते हैं जिस जाति की मायावती हैं। दलित युवाओं में चंद्रशेखर के क्रेज को लेकर थोड़ा उत्साह है। उधर, मौजूदा राजनीति में मायावती की हनक और क्रेज फीका पड़ रहा है। एक समय दलित पॉलिटिकल में मायावती का वर्चस्व था। फिलहाल देखना है कि चंद्रशेखर अपनी पार्टी के गठन के बाद दलित राजनीति में कितना तेजी से मुखर होते हैं और दलित समाज को एक सूत्र में बांधने के लिए और जनाधार हासिल करने के लिए कितना कामयाब होते हैं।