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भारत में कोविड 19 की बढ़ती रफ़्तार पर सरकार चौकस, दिल्ली निजामुद्दीन के जमात मुख्यालय बना हॉटस्पॉट
April 1, 2020 • सुरेश चौरसिया

नई दिल्ली। दुनिया भर में कोहराम मचाने वाले कोरोना  वाइरस का फैलाव काफी बढ़ता जा रहा है। 

दुनिया के कई देश काफी हलकान, परेशान हैं।  इसके चपेट में अब भारत भी फंसता दिख रहा है। मंगलवार को देश में कोविड-19 के 315 नए मामले सामने आए हैं। ये पहली बार है, जब देश में एक दिन में तीन सौ से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। सोमवार की तुलना में कोविड-19 पॉजिटिवों का यह आंकड़ा लगभग दोगुना है। अब देश में कोरोना वायरस पीड़ितों की कुल संख्या 1618 हो गई है और इसके चलते मरने वालों की संख्या भी बढ़कर 52 हो गई है। 

बीते तीन दिनों में 626 नए मामले सामने आए हैं। देश में तेजी से फैल रहे इस वायरस की यह 40 फीसदी की बढ़ोतरी है। देश में सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से हैं, जहां 302 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर केरल (241), तीसरे पर तमिलनाडु (124) और चौथे स्थान पर देश की राजधानी दिल्ली (120) है।

अभी तक झारखंड और असम ने इस घातक कोविड-19 वायरस से दूरी बना रखी थी लेकिन मंगलवार को इन दोनों राज्यों में भी पहला-पहला केस सामने आया। झारखंड की राजधानी रांची में मलेशिया की एक 22 साल की युवती में इस वायरस की पुष्टि हुई है, जो रांची में बड़ी मस्जिद में ठहरी हुई थी। यह महिला भी तब्लीगी जमात संगठन का ही हिस्सा थी और यहीं से रांची पहुंची थी।  असम के सिल्चर मेडिकल कॉलेज में एक 52 वर्षीय पुरुष की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वह कैंसर का भी मरीज है और हाल ही में दिल्ली से लौटा है। असम प्रशासन को इस व्यक्ति के भी तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लेने का शक है। 

दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में जमात का मुख्यालय भारत में सबसे बड़े कोरोना वायरस हॉटस्पॉट में से एक के रूप में उभरा है जिसमें अभी तक 24 लोग कोरोना से पीड़ित मिले हैं, जबकि लगभग 200 लोगों में संक्रमण के लक्षण दिख रहे हैं। 2100 लोगों को बाहर निकाला गया है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित तबलीगी जमात। यहां  मुख्यालय में एक हजार से ज्यादा लोगों के मौजूद होने की जानकारी सरकारी एजेंसियों को मिले थे. गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इसमें से 216 विदेशी नागरिक थे. इसके अलावा देश के कई हिस्सों में 824 विदेशी मौजूद थे. दरअसल, तब्लीगी की गतिविधियां डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर के माध्यम से संचालित होती हैं. इस मामले के सामने आने के बाद अभी तक देश में मौजूद इनके डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर और प्रदेश प्रशासन के माध्यम से 2137 लोगों की पहचान हुई है. इन्हें अलग रखा गया है. इनकी पहचान करने की प्रक्रिया लगातार जारी है.

जानकारी मिली है कि यहां मौजूद लोगों की 26 मार्च से लगातार मेडिकल जांच चल रही है. इनमें से 303 लोगों में कोरोना से संबंधित संक्रमण की जानकारी मिली है. सूत्रों के अनुसार, अब तक कुल 1203 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है.

जानकारी मिली है कि यहां मौजूद लोगों की 26 मार्च से लगातार मेडिकल जांच चल रही है. इनमें से 303 लोगों में कोरोना से संबंधित संक्रमण की जानकारी मिली है. सूत्रों के अनुसार, अब तक कुल 1203 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है.

सूत्रों के अनुसार, साल 2020 की शुरुआत से अब तक करीब 2100 विदेशी नागरिक इस संगठन के धार्मिक जलसे के सिलसिले में भारत आए हैं. इसमें से 824 नागरिक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं. माना जा रहा है कि बाकी लोग लॉकडाउन से पहले वापस लौट चुके हैं.

सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने तेलंगाना में COVID-19 पॉजिटिव मामलों के सामने आते ही 21 मार्च, 2020 को सभी राज्यों के साथ भारत में जमात कार्यकर्ताओं का विवरण साझा किया था. अब तक जमात के 1339 कार्यकर्ताओं को नरेला, सुल्तानपुरी और बक्करवाला क्वारंटाइन केंद्र व अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया है.

इस मामले में राज्य पुलिस विदेशी जमात कार्यकर्ताओं के वीजा श्रेणियों की जांच करेगी. इस दौरान अगर वीजा शर्तों के उल्लंघन का मामला सामने आया तो आगे कार्रवाई की जाएगी. इससे पहले सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई की थी. इस कार्रवाई का उद्देश्य COVID-19 पॉजिटिव जमात कार्यकर्ताओं की पहचान करना था. जिसके तुरंत बाद उन्हें क्वारंटाइन किया गया. जिससे देश में COVID-19 को और फैलने से रोका जा सके.

इस संबंध में गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और डीजीपी के साथ-साथ सीपी, दिल्ली को भी निर्देश जारी किए थे. इसके अलावा 28 और 29 मार्च को भी DIB ने सभी राज्य डीजीपी को इस विषय में पत्र लिखे थे.

इस बीच, दिल्ली के निजामुद्दीन के मरकज़ में रहने वाले जमात कार्यकर्ताओं को भी राज्य के अधिकारियों और पुलिस ने मेडिकल स्क्रीनिंग के कराने के लिए अनुरोध किया. इसके बाद 29 मार्च तक लगभग 162 जमात कार्यकर्ताओं को चिकित्सकीय रूप से जांचा गया और क्वारंटाइन केंद्रों में भेजा गया.

अब तक 1339 जमात कार्यकर्ताओं को एलएनजेपी, आरजीएसएस, जीटीबी, डीडीयू अस्पतालों और ऐम्स, झज्जर के अलावा नरेला, सुल्तानपुरी और बक्करवाला क्वारंटाइन केंद्रों में स्थानांतरित कर दिया गया है. उनमें से बाकी को वर्तमान में COVID-19 संक्रमणों के लिए चिकित्सकीय रूप से जांचा जा रहा है.

जानकारी मिली है कि 21 मार्च को मिशनरी काम के लिए लगभग 824 विदेशी तब्लीगी जमात के कार्यकर्ता देश के कई हिस्सों में थे. इसके अलावा लगभग 216 विदेशी नागरिक मरकज़ में रह रहे थे. इनके अलावा 1500 से अधिक भारतीय जमात कार्यकर्ता भी मरकज़ में रह रहे थे. जबकि लगभग 2100 भारतीय जमात कार्यकर्ता मिशनरी काम के लिए देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर रहे थे. बता दें, 23 मार्च के बाद से निजामुद्दीन और तब्लीगी के आसपास और पूरे दिल्ली में कडाउन को सख्ती से लागू किया गया.

आमतौर पर, भारत आने वाले तब्लीगी जमात से जुड़े सभी विदेशी नागरिक पर्यटक वीजा पर आते हैं. गृह मंत्रालय द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देश के अनुसार जमात के इन विदेशी कार्यकर्ताओं को पर्यटक वीजा पर मिशनरी काम में शामिल नहीं होना चाहिए. इस संबंध में सभी राज्य पुलिस इन सभी विदेशी जमात कार्यकर्ताओं के वीजा की श्रेणियों की जांच करेगी और वीजा शर्तों के उल्लंघन के मामले में आगे की कार्रवाई करेगी.

तबलीगी जमात का मुख्यालय (मरकज़) दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में है. धार्मिक उद्देश्य के लिए देश भर और विदेशों से मुस्लिम मरकज़ जाते हैं. कुछ लोग तब्लीग़ गतिविधियों के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में समूहों में भी जाते हैं. यह पूरे साल चलने वाली एक सतत प्रक्रिया है.