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भारत में ख़तरनाक जैविक कूड़ा को खत्म करेगा NEOSONIC, सरकार पहल करे तो तैयार है यू.एस. एनवायरोन कंपनी
May 25, 2020 • सुरेश चौरसिया

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस जारी है और इसका फैलाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कोरोना वायरस मरीजों व डॉक्टरों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे अपशिष्ट खतरनाक जैविक कचरा से भी कोरोना का खतरा और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

चीन में कोरोना अपशिष्ट कचरे का सफल निस्तारण न करने और उसे जमीन में दबा देने के कारण पुनः कोरोना खतरे की घंटी बज गई है और दोबारा से संक्रमण का फैलाव शुरू हो रहा है।

कोरोना मरीजों के इलाज के दौरान अस्पतालों से निकलने वाले जैविक कूड़ा कचरा को समयानुसार यदि सही ढंग से समाप्त नहीं किया गया तो भारत का आगामी भविष्य भी ठीक नहीं होगा और कोरोना संक्रमण के खतरे बने रहेंगे। भारत में कूड़ा कचरा बिना निस्तारण के ही फेंका तक जा रहा है। इस पर सरकार को विशेष पहल करनी होगी। 

आज न्यूसोनिक ( neosonic )  जापानिक तकनीक के माध्यम से ठोस कचरे का निस्तारण किया जाना समय की मांग हो गया है। यह तकनीक दुनिया का सबसे बेहतरीन तकनीक है, जो बिना बिजली एवं पेट्रोलियम पदार्थों व इलेक्ट्रिक के शत-प्रतिशत हर प्रकार के कचरे को निस्तारण करने में सक्षम है।

भारत में यू .एस एनवायरोन कंपनी जो दिल्ली की एक प्रतिष्ठित रजिस्टर्ड कंपनी है जिसके निदेशक यू.एस. शर्मा हैं।उन्होंने राष्ट्रीय शान के संपादक सुरेश चौरसिया को बातचीत के क्रम में बताया कि देश में बढ़ती जनसंख्या एवं शहरीकरण के कारण अशिष्ट पदार्थ, कूड़े-कचरे भी बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण स्वास्थ्य संबंधी अनेक समस्याएं उत्पन्न होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि इस समस्या का हल करने के लिए यू .एस. एनवायरोन ने जापानी कंपनी बिग बायो कंपनी लिमिटेड व अरियाके बायोटेक लिमिटेड के साथ मिलकर Neosonic  मशीन का आविष्कार किया है।

श्री शर्मा ने बताया कि Neosonic मशीन ठोस अपशिष्ट या  कूड़े  जलाती नहीं है, बल्कि उसको 1/300 हिस्से तक छोटा कर देती है। इस प्रक्रिया द्वारा 1000 किलोग्राम (1 टन) ठोस अपशिष्ट सामग्री को 3 किलोग्राम सिरेमिक राख में बदल देती है। राख का उपयोग कृषि कार्य में खाद के रूप में किया जा सकता है।

यू. एस .शर्मा ने कहा कि Neosonic विषैले और गैर विषैले दोनों तरह के व्यर्थ सामग्री को कम ऑक्सीजन लेवल पर बिना इंसीनरेशन के डिस्पोज कर देती है जिसे कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन बहुत कम होता है। यह ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण को रोकने में सहायक होती है। यह बिल्कुल गंध रहित है तथा कोई टॉक्सिन पदार्थ का उत्सर्जन नहीं होता है।

कोरोना से अवशिष्ट पदार्थ  ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न शहरों में कूड़े-कचरे के बड़े बड़े पहाड़ खड़े हो रहे हैं। उसको भी निस्तारण करने में Neosonic सक्षम है। सरकार को चाहिए कि इस प्रक्रिया को अपनाकर देश को कूड़ा मुक्त करने में आगे आए।