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अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौता हुआ, समझौते की शर्ते जानें
March 1, 2020 • सुरेश चौरसिया

 दोहा। अफगानिस्तान में शांति स्थापना के लिए अमेरिका और तालिबान के बीच समझौते पर सहमति बन गई है। लगभग 18 महीनों की लगातार वार्ता के बाद अमेरिका-तालिबान शांति समझौते पर कतर के दोहा में हस्ताक्षर हुआ। इस मौके का अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो, कतर में भारतीय राजदूत पी. कुमारन, पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी समेत लगभग 30 देशों के प्रतिनिधि गवाह बने।

आज से लगभग 18 साल पहले अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया था। सितंबर, 2001 में न्यूयॉर्क व वाशिंगटन पर अल-कायदा के बड़े आतंकी हमले के बाद अमेरिका ने यह कार्रवाई की थी। तब वहां तालिबान का शासन था जिसे सिर्फ पाकिस्तान का समर्थन मिला हुआ था।

क्या है समझौता

- अमेरिका अगले 14 महीने में अफगानिस्तान से अपने और सहयोगी देशों के सभी 13 हजार सैनिकों को निकाल लेगा।

- पहले चरण में अगले चार महीने में अफगानिस्तान में अमेरिका और सहयोगी देशों के सैनिकों की संख्या घटाकर 8600 पर लाई जाएगी।

- तालिबान आतंकी संगठन अल कायदा के साथ अपने सभी रिश्ते तोड़ेगा और हिंसक गतिविधियों में भी शामिल नहीं होगा

- अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ अल कायदा और अन्य आतंकी संगठनों को अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल नहीं करने देगा

- 10 मार्च तक अफगानिस्तान पांच हजार तालिबानी कैदियों और तालिबान एक हजार कैदियों को छोड़ेगा। इसके बाद कैदियों को छोड़ने का काम वार्ता पर निर्भर करेगा।

- अमेरिका इस साल मई तक तालिबान के सदस्यों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों से मुक्त कराएगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते का स्वागत किया है। व्हाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में ट्रंप ने कहा, 'हम अमेरिका के सबसे लंबे युद्ध को खत्म करने और अमेरिकी सैनिकों को वापस लाने के लिए काम कर रहे हैं।'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने अमेरिका और तालिबान के बीच हुए समझौते का स्वागत किया है। गुतेरस के प्रवक्ता ने कहा कि इससे अफगानिस्तान में राजनीतिक स्थिरता कायम करने में मदद मिलेगी और हिंसा खत्म होगी।( एजेंसी )