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अमेरिका और चीन के बीच कोरोना को लेकर ट्रेड जैसी जंग शुरू
March 18, 2020 • सुरेश चौरसिया

नई दिल्ली। कोरोना को लेकर दुनिया में कोहराम मचा हुआ है। अब यह कोरोनाना वाइरस सियासी राजनीतिका रंग लेता जा रहा है। एक दूसरे पर आरोपों का बौछार शुरू कर दिया है।

अब अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर जैसी जंग शुरू हो गई है। पहले यह जुबानी लड़ाई थी, लेकिन अब चीन ने ऐक्शन लेते हुए कई अमेरिकी पत्रकारों पर प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि चीन ने अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबारों न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल और वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकारों का प्रेस कार्ड वापस लेने का फैसला किया है। अमेरिकी पत्रकारों के संकट को देखते हुए विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने चीन से अपने फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है।

दरअसल, पिछले दिनों चीन ने दावा किया था कि उनके यहां कोरोना फैलाने में अमेरिकी सैनिक जिम्मेदार हैं जिसके बाद वॉशिंगटन बुरी तरह से बिफर गया और कहा कि यह बयान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने एक ट्वीट कर अमेरिका पर यह आरोप लगाए थे जिसके बाद अमेरिका ने चीनी राजदूत को तलब किया और उन्हें अपनी नारजगी से अवगत कराया। 

'चीनी वायरस' बयान ने किया आग में घी का काम 
दोनों के बीच आग में घी का काम अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बयान ने किया जिन्होंने कोरोना वायरस को चीनी वायरस का नाम दे दिया है। ट्रंप ने सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा, 'अमेरिका एयरलाइन्स औऱ अन्य उद्योगों का मजबूती से समर्थन करेगा, जो कि चीनी वायरस से अपेक्षाकृत अधिक प्रभावित हुए हैं। हम पहले से कहीं अधिक मजबूत होंगे।' 

इस पर चीनी विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जाहिर की और कहा, 'कुछ अमेरिकी राजनीतिज्ञ चीन को कलंकित करना चाहते हैं। हम यह अपील करते हैं कि अमेरिका को इस नीच हरकत से बाज आना चाहिए। हम बेहद नाराज है और उसकी कठोर निंदा करते हैं।' यूनिस्को और डब्ल्यूएचओ भी कोरोना के लिए ऐसे नाम इस्तेमाल न करने की हिदायत दे चुके हैं, लेकिन ट्रंप पर इसका असर नहीं हुआ और उन्होंने अपने बयान को जायज ठहराते हुए कहा, ' चीनी वायरस बयान बिल्कुल उपयुक्त था।'